संस्कृत-संस्कृति पाठ योजना
एक बार मन में विचार आया कि अधुना बच्चों को संस्कृत और संस्कृति के बारे में ज्ञान देने का कोई साधन ही नहीं है | स्कूल में पढ़ाया नहीं जाता और जो पढ़ाया जाता है वह छद्म-पंथ-निरपेक्ष है यानि कि ऋणात्मक हिंदुत्व है जो कि वास्तव में भारतीय संस्कृति की आत्मा है | माँ-बाप को स्वयं ही ज्ञान नहीं है और यदि है तो वे आगे अगली पीढ़ी को देना नहीं चाहते (अन्यान्य कारणों से) | एक पंजाबी बच्ची जब मेरे पास पढ़ने आई तो पता चला उसे गुरु गोविन्द सिंह का ही पता नहीं था , कौन थे ? हतभाग्य !! बन्दा वीर बहादुर......?? वासुदेव बलवंत फड़के ??.........उफ्फ
तो फिर किया क्या जाए ? कैसे रास्ता बनाया जाए ? लीजिये प्रस्तुत है संस्कृत-संस्कृति पाठ योजना जो मैं अपने घर पर चला रहा हूँ | बच्चे जल्दी सीखते हैं और आश्चर्यजनक रूप से सीखते हैं -
और ये रहे पाठों की संरचना (बहुत ज्यादा सोचा नहीं है, सोच देर से आती है और आती ही रह जाती है | तात्कालिक रूप से जो मन में आया या बच्चों की इच्छा होती है, उसी के अनुसार पाठ हो जाता है)
संस्कृत-संस्कृति पाठ योजना
4-Feb-17
- प्रारंभ के समय, गणपति के बारे में – उनके नाम – गण+ईश, गण+पति, लम्ब+उदर, गज+आनन, वि+नायक, गण+अध्यक्ष, भाल+चन्द्र, वक्र+तुंड, एक+दन्त, कृष्ण+पिंग+अक्ष, विघ्न+ईश्वर
- श्लोक याद और अर्थ– वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः | निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||
- एक कथा – गणेश के जन्म और शिव से लड़ाई की और गजानन बनने की |
5-Feb -17
- श्लोक याद और अर्थ– वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः | निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ||
- तीन गुण – सत, रज, तम संसार की सभी चीजों का वर्गीकरण – रंग, देवता, खाना, क्रिया इत्यादि |
- त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु, महेश उनके निवास स्थान |
- एक चुटकुला – कमले कमला शेते, हरः शेते हिमालये | क्षीराब्धौ च हरिः शेते, मन्ये मत्कुणशङ्कया ||
11-Feb-17
- पुनरावृत्ति – त्रिदेव, त्रिगुण, वक्रतुण्ड महाकाय ......video
- देवी सरस्वती के बारे में, वंदना – या कुन्देन्दु तुषार.......चित्र
- ध्रुव की कथा, ध्रुव तारा, Ursa Major, Minor, Pole Star
12-Feb-17
- पुनरावृत्ति - त्रिदेव, त्रिगुण, वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ध्रुव
- संस्कृत में रंगों के नाम – श्वेत:-शुभ्र-शुक्ल, रक्त:-लोहितः, पीत:, कृष्ण:-श्यामः, धूम्र:, हरित:, पाटलः, नीलः, कपिशः
- एक कथा – प्रह्लाद-नरसिंह की कथा |
- भोजन-मन्त्र – ॐ सहनाववतु सः नौ भुनक्तु, सहवीर्यं करवावहै, तेजस्विनावधितमस्तु, मा विद्विषावहै, ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ||
18-Feb-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग
- गिनती – 10 तक
- एक कथा – गंगा और भागीरथ
- प्रारंभिक संस्कृत – गीता श्लोक – सुखदुखे समेकृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ, ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्यसि |
19-Feb-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती
- गीता-श्रीमद्भगवद्गीता, वेद, ऋक्यजुस्सामाथर्व
- एक कथा – दुर्गा जन्म
- मन्त्र – गायत्री मन्त्र|
25-Feb-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व
- त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव.......
- एक कथा – गुरु गोविन्द सिंह
- सुभाषित – अयं निजः परोवेति, गणना लघुचेतसाम् | उदार चरितानामतु वसुधैव कुटुम्बकम् ||
26-Feb-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व
- वंदना – ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरान्तकारी, भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च | गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः, सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु || नवग्रह के नाम, क्रम
- एक कथा – राहू-केतु की कहानी
- सुभाषित – अयं निजः परोवेति, गणना लघुचेतसाम् | उदार चरितानामतु वसुधैव कुटुम्बकम् ||
4-Mar-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........
- वंदना – वसुदेवसुतं देवं, कंसचाणूरमर्दनं | देवकी परमानंदं, कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ||
- एक कथा –पञ्चतन्त्र की कहानी – खरगोश-चिडिया और बिल्ली कि कहानी
- सुभाषित – सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया | सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुख भाग्भवेद् |
5-Mar-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........
- वंदना – समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तनमण्डले | विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शंक्षमस्व मे ||
- एक कथा –श्रवणकुमार, रामायण,
- सुभाषित –– सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया | सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दुख भाग्भवेद् |
18-Mar-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........ वसुदेवसुतं देवं....
- वंदना – वसुदेवसुतं देवं, कंसचाणूरमर्दनं | देवकी परमानंदं, कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ||
- एक कथा – श्रवणकुमार
- सुभाषित ––
25-Mar-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......
- वंदना – सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
- एक कथा – स्यमन्तक मणि – कृष्ण-जाम्बवन्त की कथा
- सुभाषित –– यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्याहम्||
26-Mar-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......
- वंदना – सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
- एक कथा – किरातार्जुनीयम
- सुभाषित –– यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्याहम्||
1-Apr-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......
- वंदना – या देवि सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||
- एक कथा – काली – रक्तबीज की कथा
- सुभाषित –– यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्याहम्||
9-Apr-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- श्लोक – ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ||
- एक कथा – परीक्षित-तक्षक नाग-जनमेजय
- सुभाषित –
15-Apr-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- श्लोक – करारविन्देन पदारविन्दं, मुखारविन्दे विनिवेशयन्तं | वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं, बालं मुकुन्दं मनसास्मरामि ||
- भवतः नाम किम् ? मम नाम जिया | भवती कुत्र निवसति ? अहं ग्रेटर नॉएडा नगरे निवसामि |
- एक कथा – परशुराम और कर्ण
- हास्य– वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराजसहोदर । यमस्तु हरति प्राणान् वैद्यो प्राणान् धनानि च ॥
16-Apr-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु....., रङ्ग, गिनती, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- श्लोक – ॐ सर्वेभवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुखभाग्भवेत् ||
- एक कथा – राम की शक्ति-पूजा
- सुभाषित –– कमले कमला शेते हरः शेते हिमालये, क्षीराब्धौ च हरिः शेते मन्ये मत्कुणशंकया ||
22-Apr-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु......, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- श्लोक – क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् । क्षणे नष्टे कुतो विद्या कणे नष्टे कुतो धनम् ॥||
- एक कथा – कालिय-मर्दन
- अंगों के नाम –– नयनम्-कर्णं-नासिका-जिह्वा-दन्तः-शिरः-ललाटः-भ्रू-करः-पादः-कपोलः-उदरः |
7-May-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु......, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥
- एक कथा : शिव-सती-दक्ष की कथा
13-May-17
- पुनरावृत्ति - वक्रतुण्ड महाकाय...., या कुन्देन्दु....., ॐ सहनाववतु......, ऋक्यजुस्सामाथर्व, त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्चसखा त्वमेव......., – ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकारी........वसुदेवसुतं देवं......ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं.....
- उपनिषद् महावाक्य -
- तत्त्वमसि !
- सोऽहं !
- अहं ब्रह्मास्मि !
- अयमात्मा ब्रह्म !
- प्रज्ञानं ब्रह्म !
- एक कथा : गणेश का विवाह (पृथ्वी की परिक्रमा)
No comments:
Post a Comment