जब सरस्वती शिशु मन्दिर में पढते थे (कक्षा पंचम तक) ५६ श्लोकों का तो प्रात: स्मरण था, जो सुबह assembly में बोला जाता था । उस के अलावा दोपहर के खाने के समय ४ श्लोकों का भोजन मन्त्र, पूरा वन्दे मातरम् घर जाने से पहले बोला जाता था । School में माहौल भी पूरा संस्कृतमय रहता था, classes के नाम, sections, activities के नाम सब संस्कृत में ।
तो भोजनमन्त्र, जो अभी भी थोड़ा याद है....
८. मा भ्राता भ्रातरं दिक्षन्, मा स्वसारमुत स्वसा । सम्यञ्च सव्रता भूत्वा वाचं वदत भद्रया ।
७. ॐ यन्तु नद्यो वर्षन्तु पर्जन्या:, सुपिप्पला ओषधयो भवन्तु, अन्नवतामोदनवतामामिक्षवताम् ।
एषां राजा भूयासम् । ओदन मुद्ब्रुवते परमेष्ठी वा एषः यदोदनः । परमामेवैनं श्रियं गमयति ।
९. ॐ ब्रह्मार्पणं ब्रह्महविर्ब्रह्माऽग्नौ ब्रह्मणाऽहुतम् ।
ब्रह्मैव तेन गंतव्यं ब्रह्मकर्म समाधिना ॥
१०. ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधि तमस्तु माविद्विषावहै ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
No comments:
Post a Comment